Tuesday, July 9, 2019

दुःखद खबर सतपुली के पास दर्दनाक हादसा,खाई में गिरी बस 4 की मौत 16 लोग घायल


देवभूमि उत्तराखंड को न जाने किस की नजर लग गयी है,आये दिन कोई न कोई अनहोनी सुनने  को मिलती है। अब  न जाने पहाड़ो से कब तक दर्दनाक खबरों का ये दौर जारी रहेगा।
आज दिन मै पौड़ी गढ़वाल से एक दुःखद खबर सामने आयी। पौड़ी गढ़वाल के बैजरो से कोटद्वार जाने वाली  जीएमयू की बस रीठखाल के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई। हादसा दिन में करीब 1 बजे हुआ जिसमे 4 लोगो की मृत्यु तथा अब तक हादसे में घायलों की संख्या 16  तक बताई जा रही है।हादसा इतना भीषण था की मृतकों की संख्या बढ़ने की सम्भावना जताई जा रही है।

फोटो:-दैनिक जागरण 
चश्मदीदों के अनुसार बस का ड्राइवर और कंडक्टर  नशे में  धुत थे जिसके कारण बस काबू से बाहर गयी और 500 मीटर नीचे खाई में जा गिरी। जब स्थानीय लोगो ने हादसे की खबर प्रशासन को दी  तो मौके पर पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंच गई है। टीम ने अभी तक तीन मृतकों के शव खाई से निकाल लिए हैं। वहीं 15 घायलों को भी रेस्क्यू किया जा रहा है।
आशा है घायलों को उचित इलाज  मिलेगा साथ ही सरकार इस हादसे में पीड़ित घायल तथा मृतकों के परिजनों को आश्वासन नहीं बल्कि आवश्यक सभी सहयता करेगी।
ईश्वर से इस हादसे में आहात हुए लोगो के लिए प्रार्थना करता हूँ।
    

Friday, May 17, 2019

उत्तराखंड की बेटी शीतल ने फतह किया एवेरेस्ट

कल का दिन यानी 16 मई 2019 उत्तराखंड के लिए ऐतिहासिक रहा ,कुछ ऐसा हुआ जो समाज के लिए एक उदाहरण स्थापित करने के लिए काफी  है।उत्तराखंड की नारी दुनिया में मेहनत और अपने दृढ संकल्प से कार्य-सिद्धि में प्रसिद्ध है।
आज हम इसी दृढ संकल्प से असम्भव को संभव करने की सच्ची घटना आप से साझा करूँगा।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के सोरघाटी की बेटी शीतल  राज ने अपने दृढ संकल्पो से दुनिया की सबसे ऊँची और दुर्गम चोटी माउंट एवेरेस्ट को फतह कर दुनिया भर में देवभूमि उत्तराखंड का नाम रोशन किया और साथ ही एक उदाहरण स्थापित किया कि "नारी हर क्षेत्र में पुरुषो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है कई स्थानों में पुरुषो से आगे है और कड़ी टक्कर देते है इसलिए उन्हें बेचारी न समझा जाए।



फोटो:-शीतल राज जी 

शुरुआती सफर :-

उत्तराखंड में पिथौरागढ़ जिले के सोरघाटी गाँव में जन्मी शीतल राज जी गरीब परिवार से है परन्तु उन्होंने इस चीज़ को अपने सपनो के बीच आने नहीं दिया और अपने पक्के इरादों से कई उपलब्धियों जिनमे कल हांसिल की गयी एवेरेस्ट फतह भी शामिल है ,को अपने नाम कर अपने परिवार सहित समूचे उत्तराखंड का नाम रोशन किया। 
शीतल जी के पिता उमाशंकर राज जी टैक्सी चलाकर परिवार का भरण पोषण करते है पर उन्होंने बेटी के सपनो को उड़ान मिले इस लिए अपने स्तर से हर प्रयास किया और आज उनके और उनकी बेटी के संघर्ष रंग लाये है। 



शीतल का कहना है स्कूल के दिनों से ही उन्हें पर्वतारोहण में खासी रूचि थी जिस रूचि को जूनून में बदलते देर नहीं लगी। शीतल जी ने वर्ष 2014 में एनसीसी ज्वाइन करी और इसी दौरान पर्वतारोहण में देश के प्रसिद्ध पर्वतारोहण प्रशिक्षण  संस्थानों से पर्वतारोहण में बेसिक और एडवांस कोर्स किये।
परिवार के हर पल साथ और अपनी कड़ी मेहनत के बलबूते उन्होंने इतनी बड़ी बड़ी उपलब्धियों हो हांसिल किया है।

एवेरेस्ट फतह का सफर:-

शीतल जी का एवेरेस्ट फतह करने का सपना तब परवान चढ़ा जब उन्होंने दूसरी सबसे ऊँची पर्वत चोटी कंचनजंगा को फतह करा उन्होंने तब ही ठान ली थी के वह एवेरेस्ट को एक दिन जरूर फतह करेंगी और उन्होंने इस असम्भव से लगने लक्ष्य को दृढ़ संकल्प से संभव बनाया।

उनके इस लक्ष्य को पाने में शीतल जी के साथ कई लोगो का साथ मिला जिनमे "द हंस फाउंडेशन","सनपेट","सुपरटैक",क्लिफ आदि का सहयोग मिला जिससे उनका एवेरेस्ट फतह का लक्ष्य पूरा हुआ।

Tuesday, December 25, 2018

देहरादून:-जाने क्यों जाते है बच्चे पुलिस चौकी ?

नमस्कार पाठको,आज एक ऐसी खबर से आपको अवगत करवाऊंगा जो मुझे यूँहीं फेसबुक पर विचरण करते हुए मिली फिर उसके बारे में जांच पड़ताल करी तो सोचा आप सब के साथ साझा करू।
खबर है हमारे देवभूमि की राजधानी "देहरादून" से, चलिए खबर  जानते है :-
जब भी हम पुलिस स्टेशन का नाम सुनते है तो किसी जुर्म,अनहोनी का ख्याल सबसे पहले दिमाग मे  आता है ,
परन्तु देहरादून स्तिथ प्रेम नगर पुलिस स्टेशन थोड़ा अलग है यहाँ पुलिस चौकी में  मूल सुविधाओं से वंचित बच्चो के लिए मुफ्त स्कूल चलता  है।
नंदा की चौकी झुग्गी के 50 से अधिक बच्चो के लिए यह पुलिस स्टेशन मुस्कान लाता है ,यह वह जगह है जहाँ बच्चे ABCD , अ से ज्ञ,सीखते है वो भी पुलिस अंकल-आंटी की सुरक्षा के साथ।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया और ANI की एक रिपोर्ट के अनुसार,
देहरादून के प्रेम नगर स्तिथ पुलिस चौकी से संचालित यह निःशुल्क विद्यालय,देहरादून के एक स्वयंसेवी संस्था "आसरा ट्रस्ट" के स्वयंसेवियो द्वारा चलाया जाता है यह संस्था अल्पपोषित बच्चो के लिए काम करता है। इस स्कूल में चार वर्ष से बारह वर्ष के आयुवर्ग के सभी बच्चो को  मिलाकर 51 बच्चे है ,और इन्हे रोज छः घंटे "हिंदी,अंग्रेजी,गणित,इतिहास और भूगोल पढ़ाया जाता है।


स्रोत्र-ANI 

 पुलिस ने की "आसरा" की मदद:-

ANI से बातचीत में थाना गृह  प्रभारी मुकेश त्यागी जी ने बताया जब मार्च 2018 में "आसरा" के स्वयंसेवी व्यस्त सड़क और फुटपाथ पर बच्चो को पढ़ाते थे,तब लगभग 10 बच्चे थे, बच्चो की सुरक्षा के बारे में सोचते हुए आसरा के स्वयं सेवक सुरक्षित जगह ढूंढते हुए उन्होंने हमसे मदद मांगी और हमने उन्हें स्कूल को हमारे चौकी  स्थानांतिरत  किया। 
पुलिस स्टेशन में स्कूल स्थानांतरित होने के बाद बच्चो को एक सुरक्षित माहौल मिला जिससे अन्य बच्चो के अभिभावको ने भी इस स्कूल में बच्चो का दाखिला करवाया,इसके कारण धीरे-धीरे बच्चो की संख्या बढ़ी अब स्कूल में बच्चो  की संख्या 51 पहुंच गयी है। 


स्रोत्र-ANI 
मुकेश जी ने आगे बताया की बच्चो को स्कूल आने में कठिनाईयो का सामना करना पढता था जिसके चलते उन्होंने वैन सेवा शुरू करी जैसे जैसे यह खबर स्थानीय लोगो तक पहुंची लोग सामने से आकर  अपने स्तर से योगदान करने लगे,एक व्यक्ति ने सभी छात्रों के लिए स्कूल बैग की व्यवस्था करी और बच्चो को बैग दान करे।
पुलिस कर्मी अपना नियमित योगदान देते है ,कभी कोई पुलिस कर्मचारी बच्चो के लिए भोजन व्यवस्था  कर देता है कभी कोई शिक्षक बन बच्चो को शिक्षा का दान देता है। 

इस कदम ने बदली कई जिंदगिया:-

"आसरा" और  प्रेम नगर पुलिस के साझा प्रयास ने कई अल्पपोषित छोटे बच्चो की जिंदगियों में बदलाव लाया। जो बच्चे झुग्गियों से निकल कर भीग मांगने या अपने पिता के साथ कूड़ा इक्क्ठा कर अपने जीवन को घसीट रहे थे आज वो ही  बच्चे आँखों  नए आयाम चुने,जीवन में कुछ बड़ा करने के सपने लिए स्कूल है। 
यह सब एक सपने जैसा ही तो है जो पुलिस और संस्था के सहयोग से आज साकार हुआ। 
मेरा यह लेख अगर आपको  अच्छा लगे तो शेयर करे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो तक इनका प्रयास पहुँचे। 




Monday, December 24, 2018

एक युग का मौन

आप सोच रहे होंगे ये कैसा शीर्षक है "एक युग का मौन",वजह साफ़ है मुझे इसके अलावा और कुछ शीर्षक सूझा ही नहीं आज की स्तिथि देख कर। मै कोई लेखक नहीं हूँ न मुझे लेखन का अनुभव पिछले जो भी पोस्ट लिखे उत्तराखंड को समर्पित थे पर आज का ये पोस्ट/लेख उन सभी नारी शक्ति को समर्पित है जो छोटी ओछी मानसिकता के शिकार हुए किसी न किसी तरह से।
यह पोस्ट समर्पित है सभी युवतियों को जिन्होंने ने किसी न किसी वैशी सोच वाले व्यक्ति के कारण जीवन को नर्क बनते देखा ,मुझे माफ़ करना अगर मेरे शब्दों में कुछ त्रुटि रही हो।
आये दिन अखबारों में रेप,छेड़छाड़,तेज़ाब डाल देना,पेट्रोल डाल के जला देना यही सब तो सुनने में आता है ,आखिर हमारा समाज किस दिशा में  जा  रहा है,नारी को जिस देश में " देवी स्वरुप" समझ कर पूजा जाता हो उस देश के कुछ लोग ही इस मान्यता में एक विरोधाभास का काम करते है।
आपसे एक सवाल क्या आपको निर्भया काण्ड याद है ?थोड़ी थोड़ी धुंदली यादो के किसी कोने में होगा थोड़ा सा,
यह धुंधली याद भी इसीलिए बाकी  है क्योकि लोगो ने इस केस के बाद एकजुट होकर धरने दिए,कई हफ्तों तक नारी सम्मान पर न्यूज़ चैनल पर डिबेट,लोगो ने निर्भया के लिए न्याय मांगते हुए धरने किये ,कैंडल मार्च किया,अगर इस घटना के बाद  व्यापक स्वरुप न बनता लोग इतने बड़े स्तर पर प्रदर्शन नहीं करते तो आप इसे महज एक रोजमर्र्रा की रेप घटना समझ भूल जाते।


ये एक कटु सत्य है के जब तक हम खुद दुःख से न गुजरे उस दुःख को महसूस तक कर पाना मुश्किल है।
जैसे जैसे वक्त आगे बढ़ता है लोग इस बड़ी घटना तक को भुला देते है,आप खुद ही सोचे निर्भया ने अपनी जान गवा दी कितने लोग आज भी उसके लिए लड़ते है !जैसे जैसे वक्त बीता साथ जो खड़े थे उन लोगो की संख्या कम होती गयी ,अंत में परिवार अकेला खड़ा था क्युकी उन्होंने अपनी बेटी खोई।
देश में ना जाने कितने ऐसे केस होते हो जो FIR का रूप लेकर फाइल में दब जाते है और आरोपी खुला घूमता है,
  अभी  16 दिसंबर 2018 को उत्तराखंड में पौड़ी जिले के कफोलस्यूं पट्टी की बी.एस.ई की छात्रा पर गहड़ गाँव के एक शादीशुदा युवक मनोज ने पेट्रोल डाल कर आग लगा दी ,और खुद पीड़िता की माँ को फ़ोन कर बोला कि   "मैंने तुम्हारी बेटी को आग लगा दी बचा सकते हो तो बचा लो"

इस घटना में लड़की 70%  तक जल चुकी  थी,लड़की को श्रीनगर  के जिला अस्पताल में इलाज करवाने ले जाया गया,हालत नाजुक होते देख उसे ऋषिकेश स्तिथ AIIMS लाया गया,परन्तु बाद में पीड़िता की हालत नाजुक होने के चलते  दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल ले जाया गया।
इस घटना का जब स्थानीय लोगो को पता चला तो उन्होंने प्रदर्शन करने शुरू करे,राज्य के भिन्न भिन्न स्थानों पर पीड़िता को न्याय दिए जाने के लिए प्रदर्शन करे गए।
पुलिस ने जब आरोपी से पूछताछ की तो उसने गुनाह कबूला और बताया कि उसने इस घटना को अंजाम अपनी बेईज्जती का बदला लेने के लिए दिया। पीड़िता ने दो साल पहले छेड़खानी के चलते आरोपी को सबके सामने थप्पड़ मारा था,इस घटना का बदला लेने के लिए आरोपी मौके की तलाश में था और उसे मौका तक मिला जब पीड़िता प्रयोगात्मक परीक्षा देकर अपनी स्कूटी से घर जा रही थी,आरोपी मनोज ने उसका पीछा करा और इस वारदात को अंजाम दिया।
हफ्ते भर जिंदगी और मौत से संघर्ष करते हुए कल 23 दिसंबर 2018 को पीड़िता ने दम तोड़ दिया,पीड़िता का अंतिमसंस्कार उनके पैतृक गांव में किया जाएगा
यह  घटना अपने पीछे कुछ सवाल छोड़ गयी,अगर हम अपने राज्य और देश की बेटियों को सुरक्षित रखना चाहते है तो इन सवालों का जवाब देना पड़ेगा
सवाल है:-
आखिर इन वारदातों का इंतज़ार क्यों किया जाता है की कोई आये और ऐसी शर्मनाक हरकत को  दें ?
आखिर क्यों आरोपी को तत्काल सख्त से सख्त सजा देकर पीड़ित वर्ग को न्याय के लिए भटकना पड़ता है ?
जब मालूम था के उत्तराखंड में इतनी नाजुक स्तिथि से झूझ रही पीड़िता का  इलाज संभव नहीं है तो उसे सीधा दिल्ली क्यों नहीं ले जाया गया
आखिर इन वारदातों को रोकने के लिए सरकार कब कड़े कानून बनाएगी जिससे गुनाह करने से पहले व्यक्ति 100  बार सोचे।
मेरा आप सभी से अनुरोध है,इस विपदा की घडी में एकजुट होकर परिवार का हौंसला बढ़ाये और प्रदर्शनो को मात्र कुछ दिन की औपचारिकता न बनने दें,और जब तक पीड़ित परिवार को न्याय न मिले तब तक संघर्ष जारी रके ताकि सरकार की नींद खुले और वो सख्त से सख्त  कानून बना कर इन घटनाओ को रोक सके
अंत में मेरी ईश्वर से प्रार्थन है की दिवंगत आत्मा को मोक्ष दें और पीड़ित परिवार को इस असहनीय दुःख झेलने की क्षमता दें।
मेरे द्वारा इस लेख में कोई भी त्रुटि हो तो मुझे माफ़ कीजियेगा  

Saturday, December 1, 2018

गढ़वाली सीखें: गढ़वाली शब्दकोष भाग-3

आज गढ़वाली सीखने की श्रृंखला में आज बात करेंगे भिन्न भिन्न पशु और पक्षियों को गढ़वाली में क्या कहा जाता है। तो चलिए जानते है-

        गढ़वाली में पक्षीयों के नाम -            
                   हिंदी                                       गढ़वाली 
          1.    कबूतर                                      घुघुती
          2.    चील                                         चिलांग
          3.    मुर्गी                                         कुखड़
          4.    गौरया                                      घिंडुड़ी/घेंडुड़ी
          5.    कौवा                                        कागा
          6.    उल्लू                                         घुगू
       
     गढ़वाली में पशुओ के नाम -
                 हिंदी                                         गढ़वाली 
         1.    हिरन                                         घ्वीड़
         2.    बंदर                                          बांदर
         3.   लंगूर                                          गूणी
         4.   बिल्ली                                        बिरल
         5 .   बैल                                            बल्द
         6 .   गाय                                           गौड़ी
         7.    लोमड़ी                                        स्याल
         8.    छिपकली                                    छिपाड़ु
         9.    चूहा                                            मूसू
        10.   भालू                                           रिक्ख

आशा है,आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो शेयर करे और अगर कोई त्रुटि हो तो जरूर बताये।             

Friday, November 30, 2018

कुमाउनी मुहावरे/लोकोक्ति



1.ना ग्ये अल्माड़ ,ना लाग गलमाड़। 
अर्थात-घर से बाहर निकल कर ही असली दुनिया का पता चलता है। 
2 लेखो पल-पल को लिखो जालो।
अर्थात-भगवन सभी कर्मो का लेखा जोखा रखता है। 
3. रूप रीश नै,कर्म बाँटो नै।  
अर्थात-हमे किसी के रूप से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए यह ठीक वैसा है जैसे की कर्म को बाँटा  नहीं जा सकता। 
4. जे खुट त्याड ह्वाल,वो भयो पड़ल।  
अर्थात-जो जैसा करेगा वैसा भरेगा। 
5. बुद्धि आलि अपुन घर,रीश आलि पराय घर। 
अर्थात-बुद्धिमान व्यक्ति अपने घर में गुस्सा  नहीं करते।
6. जैक पाप,उवीक छाप। 
अर्थात- चोर कितना भी चालाक क्यों न हो कुछ न कुछ सुराग छोड़ ही देता है। 
7.पुण्य रेख में मेख मारंछू।
अर्थात-श्रद्धा से किये गए काम बिगड़े भाग्य को भी बदल सकते है। 
8.तात्तए खू जल मरुँ। 
अर्थात-ज्यादा जल्दी में काम बिगड़ जाता है। 
9.सास थें कुन,ब्वारीस सुणून। 
अर्थात-किसी और के माध्यम से किसी की चुगली सुनना। 
10. अति बिरालु मूस न मरण। 
अर्थात-ज्यादा लोग होने पर काम में रुकावट आती है।     

आशा करता हूँ पोस्ट अच्छी लगी हो ,कोई त्रुटि या सुझाव हो तो कमेंट के माध्यम से जरूर बताये और अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे ताकि मेरा देवभूमि की संस्कृति और बोली भाषा को बढ़ावा देने का प्रयास सफल हो।  

गढ़वाली मुहावरे/लोकोक्ति(पखाणा)



1. जख बिरळु नि तख मूसा नचणा ।
  (जहाँ बिल्ली नहीं वहाँ चूहे नाच रहे )
अर्थात-जहाँ नियंत्रण न हो वहां कुछ भी अप्रिय घटना हो सकती है। 
2 . लेणु एक न देणु दुई
(लेना एक न देना दो)
अर्थात-किसी से मतलब न रखना
3.अफु चलदन रीता, हैंका पड़ौंदन् गीता |
(अपने आप खाली चलते है और दूसरो को गीता पढ़ाते हैं )
अर्थात- खुद अज्ञानी होते हुए भी दूसरो को ज्ञान बांटना
4. टका न पैसा, गौ गौ भैंसा
(पैसे नहीं पर गाँव गाँव में भैसे होना)
अर्थात- आर्थिक रूप से दुर्बल होने पर भी सम्पन्नता के सपने देखना
5.खाली हाथ मुख मा नि जांदू |
 (खाली हाथ मुहँ में नहीं  जाता)
अर्थात-बिना पैसे के कोई भी कुछ काम नही करता |
6.बुज्या कु बाघ
 (झाड़ी का बाघ)
अर्थात- भ्रम में झाडी भी बाघ जैसी लगना |
7. सौंण सूखो न भादो हेरो|
(न सावन सूखा,न भादो हरा)
अर्थात-हर समय एक सा रहना |
8.जखि देखि तवा-परात, वखि बिताई सारी रात |
(जहाँ देखी तवा-परात,वहाँ सारी रात)
अर्थात- अपनी सुविधा के अनुसार स्वार्थ सिद्ध करना |
9. नादान कु दगडू, जी कु जंजाल |
(नादान का साथ, जी का जंजाल)
अर्थात- अयोग्य व्यक्ति से काम करवाना मुसीबत मोल लेना है |
10.घी खत्यो पर बोड्यो मा|
(घी गिरा पर बर्तन में)
अर्थात-हानि होते हुए भी बड़ी हानि टल जाना |  





Saturday, November 24, 2018

कुमाउनी सीखें:कुमाउनी शब्दकोष भाग-2

नमस्कार दोस्तों ,कुमाउनी भाषा सीखने के इस श्रृंखला के दूसरे भाग में आज हम जानेगें कुमाउनी भाषा में रिश्तो के बारे में। 
चलिए जानते है :-

                 हिंदी                                                           कुमाउनी 

  1. दादा जी                                                            बर्बाज्यू 
  2. दादी जी                                                            आमा 
  3. पिताजी                                                             बाबू   
  4. माता जी                                                            ईजा 
  5. बेटा                                                                   चेला 
  6. बेटी                                                                   चेली 
  7. छोटी बहन                                                         बैन   
  8. छोटा भाई                                                          नान भौ 
  9. बड़ा भाई                                                            दाज्यू 
  10. बड़ी बहन                                                           दीदी 

गढ़वाली सीखें: गढ़वाली शब्दकोष भाग-2

आप सभी के सामने प्रस्तुत है गढ़वाली भाषा को सीखने के लिए शुरू की गयी श्रृंखला का भाग 2. जिसमे आज बात करेंगे गढ़वाली में भिन्न भिन्न रिस्तो को क्या कहा जाता है तो चलिए जानते है

                               हिंदी                                 गढ़वाली 

  1.                   माता जी           -                  बोई/माँ जी 
  2.                   पिता जी           -                   बब्बा जी 
  3.                   बेटा                  -                   नौनु 
  4.                   बेटी                  -                   नौनी 
  5.                   भाई                  -                   भे/भैजी 
  6.                  बहन                  -                   भेण 
  7.                 दादा/दादी            -                   दादा/दादी 
  8.                 ताऊ जी               -                   बोड़ा 
  9.                 ताई जी                -                   बॉडी  
  10.                 चाचा जी              -                   चच्चा/काका 
  11.                 चाची जी              -                   चच्ची/काकी 
  12.                 पिता की बहन      -                   फुफ्फु 
  13.                 माता जी बड़ी बहन -                 जेठी 
  14.                 भाई का बेटा           -                  भतीजु
  15.                 भाई की बेटी           -                  भतीजी 
  16.                 बहन का बेटा          -                  भणजु 
  17.                 बहन की बेटी          -                  भणजी 
  18.                 छोटा भाई              -                   भुल्ला 
  19.                 छोटी बहिन            -                   भुल्ली 
  20.                  बड़ी बहन              -                   दीदी 

Friday, November 23, 2018

उत्तराखंड की सबसे प्रसिद्ध जगहें भाग-1

उत्तराखंड पूर्व में उत्तराँचल का गठन 9 नवंबर 2000 को हुआ। उत्तराखंड में कई देवस्थल है इसलिए उत्तराखंड को देवभूमि भी कहा जाता है। प्रकृति ने उत्तराखंड को फुरसत में बनाया है,उत्तराखंड का चप्पा चप्पा सूंदर प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है।

अगर आप उत्तराखंड से है या उत्तराखंड आने का विचार बनाने जा रहे है तो यह पोस्ट आप के लिए है।यह पोस्ट उन सभी जगहों की जानकारी का संकलन है जहां आपको एक बार जरूर जाना चाहिए।

उत्तराखंड की सभी प्रसिद्ध जगहों को एक भाग में सूचीबद्ध करना मुमकिन  नहीं इसलिए  मेरा प्रयास रहेगा के सभी अहम् स्थल को कुछ भागो में सूचीबद्ध कर सकू। तो चलिए जानते है "भाग एक" में कौन  कौन  से प्रसिद्ध जगह है :-

1. देहरादून:-

देहरादून हिमालय की तलहटी में बसा एक सुंदर शहर है जिसे  उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी का दर्जा मिला है ,देहरादून उत्तरखंड के सबसे विकसित शहरो में से एक शहर है। देहरादून पर्यटन की दृष्टि से भी सम्पन्न है।
top 10 place to visit in uttarakhand
 अगर आप देहरादून घूमने आये तो आप इन स्थानों में एक बार जरूर जाए :-
  • आसन बैराज 
  • मालसी डिअर पार्क 
  • मिन्ड्रोलिंग मोनास्ट्री 
  • राजाजी नैशनल पार्क 
  • राम ताल हॉर्टिकल्चर गार्डन 
  • रोब्बर'स केव 
  • शहस्त्रधारा  
  •  साईं दरबार 
  • टपकेश्वर महादेव 
  • टाइगर फाल्स 
  • FRI(फारेस्ट रीसर्च इंस्टीट्यूट) 

2. मसूरी :-

मसूरी जिसे "पहाड़ो की रानी" भी कहा जाता है,मसूरी को यह नाम अपने सुंदर बर्फ से ढके पहाड़ो के कारण मिला है यहाँ हर तरफ आपको मनमोहक दृश्य देखने को मिलेंगे।


मसूरी समुद्रतल से 6000 फ़ीट ऊपर स्तिथ है जिसके कारण भीषण गर्मी पड़ने पर भी यहाँ तापमान ठंडा रहता है। वर्ष भर यहाँ पर्यटकों का आवागमन लगा रहता है।
                                     
अगर आप भी मसूरी आने का सोच रहे है तो इन जगहों पर जरूर एक बार जाए :-
  • कैमल्स बैक रोड 
  • क्राइस्ट चर्च 
  • धनौल्टी 
  • गन हिल 
  • केम्पटी फाल्स 
  • लाल टिब्बा 
  • मॉल रोड 
  • सर जॉर्ज एवेरेस्ट हाउस 

3. हरिद्वार :-

हरिद्वार जिसे हरद्वार के नाम से भी जाना जाता है,हिन्दुओ का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। पौराणिक मान्यता के अनुसार हरिद्वार ही वही स्थल है जहाँ  शिव जी ने अपनी जटाओ से माँ गंगा को धरती पर अवतरित किया था,इस कारण हरिद्वार को "गंगाद्वार" भी कहा जाता है। 
हरिद्वार/हरद्वार को  हिन्दूओ के सात पवित्र स्थल (सप्त पूरी) में से एक है।
                                                               चित्र:-हर की पौड़ी 
पौराणिक कथा के अनुसार "समुद्रमंथन के समय जब अमृत कलश लेकर जा रहे थे तो कुछ स्थानों पर अमृत कलश से कुछ बूंदे हरिद्वार में भी गिरी ,इसी कथा के कारण हरिद्वार में  हर 12 वर्षो  में कुम्भ मेला आयोजित किया जाता है। 
हरिद्वार  हिन्दूओ  का पौराणिक तीर्थ है ,जो अपने घाटों के लिए प्रसिद्ध है ,इन घाटों में "हर की पौड़ी" विख्यात है। हरिद्वार में माँ पारवती के शक्ति पीठ "चंडी देवी और मनसा देवी " विराजमान है। जो हरिद्वार को तीर्थो का केंद्र बिंदु बनता है।   
अगर आप हरिद्वार आने का विचार बना रहे है तो इन स्थानों में जरूर जाए :-
  • हर की पौड़ी 
  • चंडी देवी 
  • मनसा देवी 
  • विष्णु घात 
  • दक्षप्रजापति मंदिर 


4.ऋषिकेश:-

ऋषिकेश जिसे "तीर्थ नगरी" के नाम से जाना जाता है जो देहरादून जिले के अंतर्गत आता है। ऋषिकेश में साल भर पर्यटकों का आवागमन लगा रहता है ,ऋषिकेश में देश-विदेश से कई पर्यटक यहाँ स्थित स्थलों में घूमने के साथ-साथ यहाँ योग सीखने  भी आते है। 
ऋषिकेश में पर्यटन स्थल के साथ साथ कई  योग प्रशिक्षण संसथान है इसलिए ऋषिकेश को "विश्व की योग राजधानी और योग नगरी के नाम से भी जाना जाता है। 
ऋषिकेश में पर्यटक राफ्टिंग,बंजी जंपिंग  आदि का लुत्फ़ उठाने दूर दूर से आते है। 

अगर आप उत्तराखंड आये तो एक बार ऋषिकेश स्तिथ इन स्थानों पर भी जरूर जाए :-
  • राम झूला 
  • लक्ष्मण झूला 
  • त्रिवेणी घाट 
  • नीर झरना 
  • पटना झरना 
  • कौडियाला 
  • शिवपुरी 
  • महर्षि महेश आश्रम(बीटल्स आश्रम)/84 कुटिया 
  • चोटीवाला रेस्टॉरेंट  

5.नैनीताल :-

नैनीताल उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में एक बेहद अहम् स्थान रखता है ,आपकी उत्तराखंड ट्रिप बिना नैनीताल गए अधूरी ही है। नैनीताल उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल में आता है। नैनीताल को झीलों का शहर भी कहा जाता है। नैनीताल को उसका नाम नैनीताल में स्तिथ आम के आकर की नैनी झील के कारण  मिला है। 
यहाँ हर साल पर्यटकों का आवागमन लगा रहता है। पर्यटक यहाँ झील पर बोटिंग का लुत्फ़ लेते है। 


आप नैनीताल आये तो इन जगहों पर एक बार जरूर जाए :-
  • नैनी झील 
  • माल रोड 
  • नैना देवी मंदिर 
  • स्नो व्यू पॉइंट 
  • ज्योलिकोट 
  • नैना पर्वत शिखर 

Wednesday, November 21, 2018

उत्तराखंड की शान बेटे:-आशुतोष नौटियाल

देवभूमि की छुपी प्रतिभाओ को आप तक लाने के लिए जो यह संकलन तैयार किया है उसे आगे बढाते हुए आज आपको एक ऐसे युवक से  जुडी कुछ बातें बताने जा रहा हूँ जो अपनी प्रतिभा के बल पर निरंतर आगे बढ़ रहा है ,बस उन्हें चाहिए आप सभी का साथ ताकि वो और आगे बढे और देवभूमि का नाम विश्वपटल पर स्थापित करे

आज बात करने जा रहा हूँ "आशुतोष नौटियाल" जी की जो एक संगीतज्ञ(म्यूजिशियन) है। आशुतोष भैजी मूल रूप से गाग्वारस्यूं घाटी (जो की पौड़ी शहर के नजदीक है) से है,और हाल में दिल्ली एनसीआर में रहते है। आशुतोष भैजी महाराजा सूरजमल इंस्टिट्यूट से BCA कर रहे है ।


अब बात करते है भाई की प्रतिभा के बारे में -
इन्हे 5 साल की उम्र से ही वाद्य यंत्रो में रूचि थी और बाद में यह शौक बढ़ता गया और उन्होंने धीरे धीरे खुद से सीखते हुए यह मुकाम हासिल किया। आशुतोष भैजी एक अलग तरह का वाद्य यंत्र जिसे मेलॉडिका (इटालियन वाद्य यंत्र) कहते है पर सभी तरह के गाने चाहे वो बॉलीवुड हो ,अंग्रेजी गाने हो या चाहे हमारे अपने पहाड़ी गीत सभी गीतों को वो दो-तीन बार सुनने भर से ही उसकी धुन बना देते है जो की अपने आप में आश्चर्य का विषय है। 
आशुतोष भैजी से हुई बातचीत में उन्होंने बताया के उन्हें बचपन से ही संगीतमय माहौल मिला जिससे उनकी संगीत और वाद्य यंत्रो में रूचि बढ़ी। वह आगे बताते है की उन्हें ,उनके नाना जी श्री R.P कुकरेती जी (जो की 90 के दशक में एक प्रसिद्ध हारमोनियम वादक और गीतकार रहे ) और माता जी श्रीमती कंचन नौटियाल जिन्होंने ने संगीत विषय से मास्टर्स करा है उन्ही से विरासत में मिला है। 
आशुतोष आगे बताते है कि उनके परिवार के सभी सदस्य संगीत प्रेमी रहे  और उन्हें उनकी माँ जी हारमोनियम पर "सा,रे,गा,मा "सिखाया करती थी और जब वे दो-तीन साल के थे उनके पिता जी उनके लिए वाद्य यंत्र जैसे छोटा पियानो आदि लाते थे ,जो के उनके संगीत के लिए एक मजबूत नीव बना,वो कहते है न बच्चे के लिए पहली पाठशाला उसका घर का माहौल होता है,उनका परिवार ही है जिनके कारण आशुतोष इस मुकाम पर आये।
                                                  चित्र :आशुतोष  अपने पियानो के साथ 
 आगे बात चीत में उन्होंने बताया के उन्हें अपनी देवभूमि से बेहद लगाव है और वे अपने दादा जी श्री A.P नौटियाल जो के भारतीय सेना से ब्रिगेडियर कैप्टन पद  पर सेवानिवृत्त है और पिता श्री मनोज नौटियाल जो के समाज सेवक है और कई सामाजिक कार्य करते आये है ,इन्ही की तरह वे अपने देवभूमि के लिए कुछ करना चाहते है और इस कार्य में वे चाहते है कि  उत्तराखंड की लोक संस्कृति यहाँ का लोक संगीत विश्व भर में प्रसिद्ध हो वे इस कार्य में अपना हर संभव प्रयास करने को समर्पित है।
                                                  चित्र:-आशुतोष नौटियाल 
 आशुतोष ने बताया की धीरे धीरे उन्होंने इस रूचि को आगे बढ़ाया और नए तरह के वाद्य यंत्र मेलॉडिका जोकि एक इटालियन वाद्य यंत्र है उसे वह 17 साल की उम्र से ही बिना किसी प्रशिक्षण संस्थान में गए बजाने  लगे और धीरे धीरे अपने अभ्यास के बल पर वो इस वाद्य यंत्र में पारंगत हो गए। 
                                          चित्र:-इटालियन वाद्य यंत्र "मेडोलिका"

आशुतोष ने धीरे धीरे अपने इस हुनर को निखारते रहे और इसे लोगो के सामने लाते रहे,जैसा की सब जानते है आज इंटरनेट का युग है मिनिटो में ही आप अपनी प्रतिभा लाखो लोगो तक पहुंचा सकते है आशुतोष ने भी संचार और इंटरनेट के माध्यम से लोगो तक अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू करी। इस सब के लिए उन्होंने सोशल साइट जैसे फेसबुक और वीडियो को लोगो तक पहुंचाने के लिए यूट्यूब के मंच का प्रयोग किया। वो जो भी गीत पर धुन बनाते उसे अपने भाई शान्तनु नौटियाल की मदद से रिकॉर्ड करके उपलोड करते। 
                                           चित्र:-आशुतोष अपने मेडोलिका के साथ 
आशुतोष भैजी ने अब तक कई गीतों को अपने मेडोलिका द्वारा नया अंदाज़ दिया जिसे आज की भाषा में कहे तो उन्होंने कई हिट गीतों पर मेडोलिका कवर बनाया है। उन गीतों में गढ़वाली गीत -ठंडो रे ठंडो, बाजु रंगा,नंदू मामा की स्याली,चैत की चैत्वाल,पहाड़ी मैशप शामिल है,इसके साथ ही उन्होंने पंजाबी हिट सांग "दारु बदनाम","मेरे वाला सरदार",और साथ ही इन्होने अंग्रेजी गानो के भी मेलॉडिका कवर सांग करे जिनमे "मैरून 5 का बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध गीत "गर्ल लाइक यू " ,और K391 और एलन वॉकर का गीत "इगनाईट" शामिल है। 
बॉलीवुड गानो की बात करे तो आशुतोष ने अब तक "देखते देखते(बत्ती गुल मीटर चालू),बारिश(हाफ गर्लफ्रेंड),फिर भी तुमको चाहुगा ,आदि शामिल है 
इन्होने अब तक अपने यूट्यूब चैनल पर 64 वीडियो डाले है जिन्हे आपको एक बार जरूर देखना चाहिए। आप नीचे दिए लिंक पर जाकर भाई के चैनल के वीडियो एक बार जरूर सुने और समर्थन स्वरुप चैनल सब्सक्राइब करना न भूले। 

                                 Ashutosh Nautiyal-Youtube channel 

आशुतोष अपने कॉलेज में फंक्शन्स के दौरान कई बार अपने इस प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके है जिससे उन्हें काफी सराहना भी मिली। 


लायक बनो कामयाबी अपने आप सामने से आएगी "
आशुतोष भैजी  के लिए ये लाइन असल जिंदगी में लागू होती है ,वे जैसे जैसे अपने हुनर को आगे बढ़ा रहे है उन्हें उनके हुनर के लिए सराहा भी जा रहा है ,आशुतोष अपने प्रतिभा के चलते भारत के पहले ऑनलाइन प्रतियोगिता "सबकुछ सिम्फनी 2017  में टॉप 10  विजेताओं में से एक बने। 

इसके साथ ही कई बार उनके वीडियो पर सेलेब्रिटी ने अपनी प्रतिक्रिया जताई और उन्हें सराहा। उनकी प्रतिभा को सराहने वालो में K391 प्रोडक्शन ,पंजाबी सिंगर परम सिंह (जिन्होंने  खुद दारु बदनाम गीत गाया है )ने उनका दारू बदनाम पर मेलॉडिका कवर को सराहा ,रोचक कोहली ,नेहा मलिक,जुगराज संधू जैसे दिग्गजों ने उनके काम को सराहा। 
यही नहीं  हमारी देवभूमि के कई दिग्गज म्यूजिशियन एवं कलाकारों   जैसे गुंजन डंगवाल(चैत की चैत्वाल), पांडवास,निराला नेशन प्रोडक्शन,शिवम् भट्ट,शंकल्प खेतवाल आदि ने उन्हें सराहा और  आने वाले प्रोजेक्ट में साथ काम करने का प्रस्ताव भी दिया। उनके द्वारा बनाये ठंडो रे ठंडो -मेलॉडिका  कवर को खुद गढ़रत्न श्री  नरेंद्र सिंह नेगी जी ने अपने ऑफिसियल पेज पर शेयर करा।  
                                          चित्र:K391 द्वारा आशुतोष भाई की वीडियो शेयर की गयी 

                                     चित्र:दारू बदनाम गीत के सिंगर परम सींग द्वारा सराहना 
                            

                               चित्र:दिग्गज संगीतकार गुंजन डंगवाल ने उनका कवर शेयर भी करा 

                            चित्र:-देवभूमि के प्रसिद्ध संगीतकार "गुंजन डंगवाल जी के साथ आशुतोष 
                            चित्र:नरेंद्र सिंह नेगी जी द्वारा आशुतोष भाई द्वारा बनाये कवर शेयर किया 

श्रीमती ज्योति बहुगुणा जी ने इन्हे अपने स्कूल में आमंत्रित किया ताकि वह अपने संगीत में जो प्रतिभा है उससे बच्चो को एक सन्देश दे पाए ताकि बच्चो का रुझान संगीत और अपनी संस्कृति के प्रति हो सके ,
चित्र:बच्चो को संगीत के गुर बताते आशुतोष 


 आशुतोष आगे बताते हुए अपने  संगीतमय सफर में साथ रहे उनके दोस्त-सात्विक पलित,प्रयांश जैन ,अंकित बंसल,शुभम सक्सैना ,बिराट कुमार,अमन राजपूत,विशाल चौधरी,दीपक कुमार ,शिवानी नेगी ,हिमांशु नेगी ,अंजलि रावत को अपने इस सफर में उनके साथ रहने के लिए धन्यवाद देते है। 
वे आगे धन्यवाद उन फेसबुक पेज को भी देते है जिन्होंने उनके वीडियो को शेयर करा और उनकी इस छुपी प्रतिभा को लोगो के सामने रखा। 
अंत में मै  ईश्वर से उनके स्वर्णिम भविष्य की कामना करता हूँ 
 आपसे पूरी उम्मीद है कि आप अपने प्रतिभा के दम पर उत्तराखंड और हमारे लोक संगीत को विश्व पटल पर एक नए आयाम के साथ स्थापित करेंगे और अपने जीवन में कई और उपलब्धिया हांसिल करेंगे 

   
    

  

Monday, November 19, 2018

उत्तराखंड की दीपावली (बग्वाल-ईगास)

नमस्कार पाठको, आज आप सभी से इस पोस्ट के  माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति  जुडी जानकारी साझा करुँगा। उत्तराखंड की सभ्यता संस्कृति और पर्व-त्योहारों को मनाने का तरीका अपने आप में अनूठा होता है। आज उत्तराखंड में मनाये जाने वाले पर्व ईगास -बग्वाल(दीपावली)   के बारे में आपको  बताने जा रहा हूँ इसका उत्तराखंडवासी और यहाँ  से प्रवास  कर चुके प्रवासी भी बेसब्री से इंतजार करते। है इगास-बग्वाल का  प्रचलन धीरे धीरे लुप्त होता जा रहा है ,आज की नयी पीढ़ी को इस पर्व के बारे में  ढंग से कुछ पता भी नहीं है ,आशा है मेरी यह पोस्ट कुछ हद तक इस लोक पर्व की महत्ता को समझा सके। 
इगास-बग्वाल को उत्तराखंड की दीपावली के रूप में जाना जाता है,इगास का मतलब ग्यारह(11), दीपावली के ग्यारह दिन  बाद यह पर्व मनाया जाता है ,इस दिन बरसो से चली आ रही परम्पराओ को निभाया जाता है जिसमे महिलाये तरह तरह के व्यंजन जैसे-दाल के पकोड़े आदि  बनाते है। 
देवभूमि में इस दिन भैलो खेलने का रिवाज है,जो की लोगो के आकर्षण का केंद्रबिंदु रहता है,इस दिन का लोग बेसब्री से इंतज़ार करते है क्यूंकि इस दिन वह एक साथ मिलकर भैलो खेलकर या नृत्य कर  अपनी ख़ुशी एक दूसरे से बाँटते है। 
bagwal,bhailo
भैलो का मतलब एक ऐसी रस्सी से है जो  पेड़ो की छाल से तैयार की जाती है ,बग्वाल के दिन लोग इन रस्सियों पर आग लगा कर रस्सी को घुमाते है। 
                                                          फोटो सौजन्य :jagran.com 

धीरे धीरे लोग मूलभूत सुविधाओं के आभाव के चलते उत्तराखंड से पलायन कर गए और यह परम्परा धीरे धीरे लुप्त होती गयी और अब यह परम्परा प्रदेश के  कुछ स्थानों  तक ही सीमित  गयी। 
मेरा यह पोस्ट लिखने का उद्देश्य सिर्फ यह है के आज की पीढ़ी हमारी संस्कृति को समझ और जाने ताकि हमारी  लुप्त होती संस्कृति को बचाया  जाए। 
अगर आपको मेरा यह प्रयास अच्छा लगा तो ज्यादा लोगो तक शेयर करे। 
आप सभी को बग्वाल-इगास की हार्दिक शुभकामनाये। 

Monday, July 9, 2018

कुमाउनी सीखें:कुमाउनी शब्दकोष भाग-1

हमारी बोली-भाषा सीखने की यह दूसरी श्रंखला है जिसमे आप सभी के लिए कुमाउनी बोली-भाषा को सिखाने का प्रयास रहेगा। आने वाले भागो में आपको कुमाउनी बोली के बारे में ज्यादा अच्छे से जानने को मिलेगा।
कुमाउनी सीखने की शुरुवाती श्रृंखला में कुमाउनी शब्दकोष आपसे साझा करुगा

कुमाउनी शब्दकोष भाग-1

संकेतात्मक शब्द 

            हिंदी                            कुमाउँनी 
  1. कहाँ               -             कां 
  2. यहाँ               -              यां 
  3. वहाँ               -              वां
  4. नीचे              -              तैली 
  5. ऊपर             -               मैली
  6. उधर             -               उठ 
  7. इधर             -               यथ  
  8.  यहाँ से         -               यहाँ बटी 
  9. वहाँ से          -               वहाँ बटी 
आगे की कड़ी में और शब्दों को सूचीबद्ध करुँगा। आपका इस पोस्ट को पढ़ने का धन्यवाद। इन शब्दों  अनुवाद में अगर त्रुटि  है तो जरूर बताये और अगर प्रयास अच्छा  लगे तो शेयर करे