Tuesday, February 14, 2017

उत्तराखंड की पारम्परिक वेश-भूषा

उत्तरखंड मे पारम्परिक परिधान जीवन शैली के साथ साथ उत्तराखण्डी संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है ,यहाँ गढ़वाल और कुमाऊ मंडल के लोगो की अपनी अलग-अलग पारम्परिक परिधान हैं जिससे  दोनों मंडलो की संस्कृति का परिचय मिलता हैं।  नीचे गढ़वाल एवम  कुमाऊ के स्त्री-पुरुष द्वारा जो पारम्परिक परिधान पहने जाते है उनका विवरण निम्न है -

गढ़वाली पारम्परिक परिधान-

गढ़वाली पुरुष कुर्ता-पायजामा या कुर्ता धोती पहनते है ,ठंडियों के दिनों मे टोपी या पगड़ी  पहनते है पगड़ी गढ़वाली पुरुषो  का एक विशिष्ठ  परिधान हैं।  गढ़वाली पुरूषों की भांति गढ़वाली महिलाओ  का एक  अलग विशिष्ठ  परिधान है। यहाँ परिधान भी कई तरह के होते हैं। गढ़वाली लोग जो ऊपरी क्षेत्र जैसे उत्तरकाशी तथा चमोली जैसे क्षेत्रो मे रहते  वो लोग गर्म ऊनी कपडे  पहनते है तथा  निचले क्षेत्रो के लोग सूती कपडे पहनते है। 
गढ़वाल मंडल की राजपूत महिलाये अधिकतर गर्म कपडे पहनते हैं क्योंकि पहाड़ी इलाको मैं काफी ठण्ड पड़ती है।  गढ़वाली महिलाओ का परिधान घागरा होता है जिसमे क्रीज़ होती हैं इन घाघरो के अंदर  किनारो को "लवाण" कहा जाता है। पारम्परिक घागरा 9 टुकड़ो का होता है जिसमे 60 क्रीज से ज्यादा होती है तथा जिसकी लंबाई 5 फ़ीट होती है। आजकल महिलाये 4  टुकड़ो वाले घागरे को पहनना पसंद करती हैं। गढ़वाल के बहुत क्षेत्रो मैं महिलाये एक लंबी कमीज़  पहनती है जिसे "झोंगा"कहते है। जो की गढ़वाली परिधान को पूरा करता है। 


 कुमाऊनी पारम्परिक परिधान -

कुमाउनी पुरुष तथा महिलाओ का परिधान गढ़वाली पुरुष तथा महिलाओ से अलग होता है ,कुमाऊ क्षेत्र मैं विवाह मे नीले तथा लाल रंग के परिधानों को प्रयोग किया जाता है कुमाउनी पुरुष  गहरे रंग जैसे हरा ,लाल तथा भूरा रंग पहनते है।  उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रो की  भांति कुमाऊनी महिलाये 'रंगवाली पिछोरा" की बहुत शौक़ीन होती है। पारम्परिक कुमाउनी पिछोरा वानस्पतिक रंगों से बने होते हैं पर आजकल कई रंगों मैं पिछोरा उपलब्ध हैं। 


                                                               रंगवली पिछोरा 

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