Thursday, February 16, 2017

उत्तराखंड के पारम्परिक आभूषण

उत्तराखंड मे सांस्कृतिक विविधता हर पहलु मे देखने को मिलती है चाहे वो भाषा-बोली ,पारम्पारिक  परिधान हो पर्व-त्यौहार हो या चाहे यह के पारम्परिक आभूषण हर एक चीज़ मे संस्कृति का अतुल्य परिचय मिलता है। आप से अभी तक उत्तराखंड के लोक नृत्य,लोक गीत ,वाद्य यन्त्र ,पारम्पारिक परिधान ,अब आपको  उत्तराखंड के पारम्परिक आभूषणो  के बारे मे इस पोस्ट के माध्यम से बताऊँगा। उत्तराखंड के पारम्परिक आभूषण का विवरण निम्लिखित है -

शीशफूल-शीशफूल को  महिलाये  जूड़े मे  पहनती  हैं। 

मांगटीका-मांगटीके को महिलाये मांग मे पहनते हैं। यह विवाहित महिलाओ द्वारा पहने जाने वाला आभूषण हैं। 


नथ-उत्तराखडं मे विवाहित महिलाओ तथा जिस लड़की का विवाह होने वाला होता है वो पहनते  हैं। यह आभूषण के बिन उत्तराखण्ड की विवाहित महिलाओ का श्रृंगार अधूरा है।इसे नथुली भी बोलते हैं , नथ महिलाये नाक मैं पहनते है -
 

बुलाक-बुलाक नाक के बीच मे पहने जाने वाला आभूषण है यह सोने का होता है। 

झुमकी -इसे महिलाये कानो मे पहनती है यह भारतीय महिलाओ के साथ साथ उत्तराखण्ड महिलाओ  का भी एक  पारम्परिक आभूषण है।

कर्णफूल -यह झुमकी के तरह ही कानो मैं पहना जाता है  यह सोने का आभूषण होता है। 

गुलाबंद-गुलाबंद गले मे पहना जाता है ,गुलाबंद को कपडे पर सोने की छोटी छोटी टुकड़े लगाकर बनाया जाता है।

 टीमण्या- टीमण्या माला  की तरह ही गले मे पहना जाता है यह सुहागन स्त्रियों का मंगलसूत्र माना जाता है।

हँसुली-हँसुली भी गले मे पहनी  जाती  है, यह चांदी की बनी होती है जिसका वजन कम से कम  तीन तोला होता है। 
पौंची-यह हाथ मे  पहने जाने वाला सोने का आभूषण होता है। 

मुद्रिका(मुंदड़ी) -मुद्रिका को हाथ की अंगुली मे पहना जाता है। 

पाजेब(पैंजी)- पाजेब को पैरो मे पहना जाता हैं। 

   



____________________________

No comments:

Post a Comment