Friday, November 30, 2018

गढ़वाली मुहावरे/लोकोक्ति(पखाणा)



1. जख बिरळु नि तख मूसा नचणा ।
  (जहाँ बिल्ली नहीं वहाँ चूहे नाच रहे )
अर्थात-जहाँ नियंत्रण न हो वहां कुछ भी अप्रिय घटना हो सकती है। 
2 . लेणु एक न देणु दुई
(लेना एक न देना दो)
अर्थात-किसी से मतलब न रखना
3.अफु चलदन रीता, हैंका पड़ौंदन् गीता |
(अपने आप खाली चलते है और दूसरो को गीता पढ़ाते हैं )
अर्थात- खुद अज्ञानी होते हुए भी दूसरो को ज्ञान बांटना
4. टका न पैसा, गौ गौ भैंसा
(पैसे नहीं पर गाँव गाँव में भैसे होना)
अर्थात- आर्थिक रूप से दुर्बल होने पर भी सम्पन्नता के सपने देखना
5.खाली हाथ मुख मा नि जांदू |
 (खाली हाथ मुहँ में नहीं  जाता)
अर्थात-बिना पैसे के कोई भी कुछ काम नही करता |
6.बुज्या कु बाघ
 (झाड़ी का बाघ)
अर्थात- भ्रम में झाडी भी बाघ जैसी लगना |
7. सौंण सूखो न भादो हेरो|
(न सावन सूखा,न भादो हरा)
अर्थात-हर समय एक सा रहना |
8.जखि देखि तवा-परात, वखि बिताई सारी रात |
(जहाँ देखी तवा-परात,वहाँ सारी रात)
अर्थात- अपनी सुविधा के अनुसार स्वार्थ सिद्ध करना |
9. नादान कु दगडू, जी कु जंजाल |
(नादान का साथ, जी का जंजाल)
अर्थात- अयोग्य व्यक्ति से काम करवाना मुसीबत मोल लेना है |
10.घी खत्यो पर बोड्यो मा|
(घी गिरा पर बर्तन में)
अर्थात-हानि होते हुए भी बड़ी हानि टल जाना |  





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