Monday, November 19, 2018

उत्तराखंड की दीपावली (बग्वाल-ईगास)

नमस्कार पाठको, आज आप सभी से इस पोस्ट के  माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति  जुडी जानकारी साझा करुँगा। उत्तराखंड की सभ्यता संस्कृति और पर्व-त्योहारों को मनाने का तरीका अपने आप में अनूठा होता है। आज उत्तराखंड में मनाये जाने वाले पर्व ईगास -बग्वाल(दीपावली)   के बारे में आपको  बताने जा रहा हूँ इसका उत्तराखंडवासी और यहाँ  से प्रवास  कर चुके प्रवासी भी बेसब्री से इंतजार करते। है इगास-बग्वाल का  प्रचलन धीरे धीरे लुप्त होता जा रहा है ,आज की नयी पीढ़ी को इस पर्व के बारे में  ढंग से कुछ पता भी नहीं है ,आशा है मेरी यह पोस्ट कुछ हद तक इस लोक पर्व की महत्ता को समझा सके। 
इगास-बग्वाल को उत्तराखंड की दीपावली के रूप में जाना जाता है,इगास का मतलब ग्यारह(11), दीपावली के ग्यारह दिन  बाद यह पर्व मनाया जाता है ,इस दिन बरसो से चली आ रही परम्पराओ को निभाया जाता है जिसमे महिलाये तरह तरह के व्यंजन जैसे-दाल के पकोड़े आदि  बनाते है। 
देवभूमि में इस दिन भैलो खेलने का रिवाज है,जो की लोगो के आकर्षण का केंद्रबिंदु रहता है,इस दिन का लोग बेसब्री से इंतज़ार करते है क्यूंकि इस दिन वह एक साथ मिलकर भैलो खेलकर या नृत्य कर  अपनी ख़ुशी एक दूसरे से बाँटते है। 
bagwal,bhailo
भैलो का मतलब एक ऐसी रस्सी से है जो  पेड़ो की छाल से तैयार की जाती है ,बग्वाल के दिन लोग इन रस्सियों पर आग लगा कर रस्सी को घुमाते है। 
                                                          फोटो सौजन्य :jagran.com 

धीरे धीरे लोग मूलभूत सुविधाओं के आभाव के चलते उत्तराखंड से पलायन कर गए और यह परम्परा धीरे धीरे लुप्त होती गयी और अब यह परम्परा प्रदेश के  कुछ स्थानों  तक ही सीमित  गयी। 
मेरा यह पोस्ट लिखने का उद्देश्य सिर्फ यह है के आज की पीढ़ी हमारी संस्कृति को समझ और जाने ताकि हमारी  लुप्त होती संस्कृति को बचाया  जाए। 
अगर आपको मेरा यह प्रयास अच्छा लगा तो ज्यादा लोगो तक शेयर करे। 
आप सभी को बग्वाल-इगास की हार्दिक शुभकामनाये। 

No comments:

Post a Comment