Tuesday, December 25, 2018

देहरादून:-जाने क्यों जाते है बच्चे पुलिस चौकी ?

नमस्कार पाठको,आज एक ऐसी खबर से आपको अवगत करवाऊंगा जो मुझे यूँहीं फेसबुक पर विचरण करते हुए मिली फिर उसके बारे में जांच पड़ताल करी तो सोचा आप सब के साथ साझा करू।
खबर है हमारे देवभूमि की राजधानी "देहरादून" से, चलिए खबर  जानते है :-
जब भी हम पुलिस स्टेशन का नाम सुनते है तो किसी जुर्म,अनहोनी का ख्याल सबसे पहले दिमाग मे  आता है ,
परन्तु देहरादून स्तिथ प्रेम नगर पुलिस स्टेशन थोड़ा अलग है यहाँ पुलिस चौकी में  मूल सुविधाओं से वंचित बच्चो के लिए मुफ्त स्कूल चलता  है।
नंदा की चौकी झुग्गी के 50 से अधिक बच्चो के लिए यह पुलिस स्टेशन मुस्कान लाता है ,यह वह जगह है जहाँ बच्चे ABCD , अ से ज्ञ,सीखते है वो भी पुलिस अंकल-आंटी की सुरक्षा के साथ।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया और ANI की एक रिपोर्ट के अनुसार,
देहरादून के प्रेम नगर स्तिथ पुलिस चौकी से संचालित यह निःशुल्क विद्यालय,देहरादून के एक स्वयंसेवी संस्था "आसरा ट्रस्ट" के स्वयंसेवियो द्वारा चलाया जाता है यह संस्था अल्पपोषित बच्चो के लिए काम करता है। इस स्कूल में चार वर्ष से बारह वर्ष के आयुवर्ग के सभी बच्चो को  मिलाकर 51 बच्चे है ,और इन्हे रोज छः घंटे "हिंदी,अंग्रेजी,गणित,इतिहास और भूगोल पढ़ाया जाता है।


स्रोत्र-ANI 

 पुलिस ने की "आसरा" की मदद:-

ANI से बातचीत में थाना गृह  प्रभारी मुकेश त्यागी जी ने बताया जब मार्च 2018 में "आसरा" के स्वयंसेवी व्यस्त सड़क और फुटपाथ पर बच्चो को पढ़ाते थे,तब लगभग 10 बच्चे थे, बच्चो की सुरक्षा के बारे में सोचते हुए आसरा के स्वयं सेवक सुरक्षित जगह ढूंढते हुए उन्होंने हमसे मदद मांगी और हमने उन्हें स्कूल को हमारे चौकी  स्थानांतिरत  किया। 
पुलिस स्टेशन में स्कूल स्थानांतरित होने के बाद बच्चो को एक सुरक्षित माहौल मिला जिससे अन्य बच्चो के अभिभावको ने भी इस स्कूल में बच्चो का दाखिला करवाया,इसके कारण धीरे-धीरे बच्चो की संख्या बढ़ी अब स्कूल में बच्चो  की संख्या 51 पहुंच गयी है। 


स्रोत्र-ANI 
मुकेश जी ने आगे बताया की बच्चो को स्कूल आने में कठिनाईयो का सामना करना पढता था जिसके चलते उन्होंने वैन सेवा शुरू करी जैसे जैसे यह खबर स्थानीय लोगो तक पहुंची लोग सामने से आकर  अपने स्तर से योगदान करने लगे,एक व्यक्ति ने सभी छात्रों के लिए स्कूल बैग की व्यवस्था करी और बच्चो को बैग दान करे।
पुलिस कर्मी अपना नियमित योगदान देते है ,कभी कोई पुलिस कर्मचारी बच्चो के लिए भोजन व्यवस्था  कर देता है कभी कोई शिक्षक बन बच्चो को शिक्षा का दान देता है। 

इस कदम ने बदली कई जिंदगिया:-

"आसरा" और  प्रेम नगर पुलिस के साझा प्रयास ने कई अल्पपोषित छोटे बच्चो की जिंदगियों में बदलाव लाया। जो बच्चे झुग्गियों से निकल कर भीग मांगने या अपने पिता के साथ कूड़ा इक्क्ठा कर अपने जीवन को घसीट रहे थे आज वो ही  बच्चे आँखों  नए आयाम चुने,जीवन में कुछ बड़ा करने के सपने लिए स्कूल है। 
यह सब एक सपने जैसा ही तो है जो पुलिस और संस्था के सहयोग से आज साकार हुआ। 
मेरा यह लेख अगर आपको  अच्छा लगे तो शेयर करे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो तक इनका प्रयास पहुँचे। 




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