Monday, December 24, 2018

एक युग का मौन

आप सोच रहे होंगे ये कैसा शीर्षक है "एक युग का मौन",वजह साफ़ है मुझे इसके अलावा और कुछ शीर्षक सूझा ही नहीं आज की स्तिथि देख कर। मै कोई लेखक नहीं हूँ न मुझे लेखन का अनुभव पिछले जो भी पोस्ट लिखे उत्तराखंड को समर्पित थे पर आज का ये पोस्ट/लेख उन सभी नारी शक्ति को समर्पित है जो छोटी ओछी मानसिकता के शिकार हुए किसी न किसी तरह से।
यह पोस्ट समर्पित है सभी युवतियों को जिन्होंने ने किसी न किसी वैशी सोच वाले व्यक्ति के कारण जीवन को नर्क बनते देखा ,मुझे माफ़ करना अगर मेरे शब्दों में कुछ त्रुटि रही हो।
आये दिन अखबारों में रेप,छेड़छाड़,तेज़ाब डाल देना,पेट्रोल डाल के जला देना यही सब तो सुनने में आता है ,आखिर हमारा समाज किस दिशा में  जा  रहा है,नारी को जिस देश में " देवी स्वरुप" समझ कर पूजा जाता हो उस देश के कुछ लोग ही इस मान्यता में एक विरोधाभास का काम करते है।
आपसे एक सवाल क्या आपको निर्भया काण्ड याद है ?थोड़ी थोड़ी धुंदली यादो के किसी कोने में होगा थोड़ा सा,
यह धुंधली याद भी इसीलिए बाकी  है क्योकि लोगो ने इस केस के बाद एकजुट होकर धरने दिए,कई हफ्तों तक नारी सम्मान पर न्यूज़ चैनल पर डिबेट,लोगो ने निर्भया के लिए न्याय मांगते हुए धरने किये ,कैंडल मार्च किया,अगर इस घटना के बाद  व्यापक स्वरुप न बनता लोग इतने बड़े स्तर पर प्रदर्शन नहीं करते तो आप इसे महज एक रोजमर्र्रा की रेप घटना समझ भूल जाते।


ये एक कटु सत्य है के जब तक हम खुद दुःख से न गुजरे उस दुःख को महसूस तक कर पाना मुश्किल है।
जैसे जैसे वक्त आगे बढ़ता है लोग इस बड़ी घटना तक को भुला देते है,आप खुद ही सोचे निर्भया ने अपनी जान गवा दी कितने लोग आज भी उसके लिए लड़ते है !जैसे जैसे वक्त बीता साथ जो खड़े थे उन लोगो की संख्या कम होती गयी ,अंत में परिवार अकेला खड़ा था क्युकी उन्होंने अपनी बेटी खोई।
देश में ना जाने कितने ऐसे केस होते हो जो FIR का रूप लेकर फाइल में दब जाते है और आरोपी खुला घूमता है,
  अभी  16 दिसंबर 2018 को उत्तराखंड में पौड़ी जिले के कफोलस्यूं पट्टी की बी.एस.ई की छात्रा पर गहड़ गाँव के एक शादीशुदा युवक मनोज ने पेट्रोल डाल कर आग लगा दी ,और खुद पीड़िता की माँ को फ़ोन कर बोला कि   "मैंने तुम्हारी बेटी को आग लगा दी बचा सकते हो तो बचा लो"

इस घटना में लड़की 70%  तक जल चुकी  थी,लड़की को श्रीनगर  के जिला अस्पताल में इलाज करवाने ले जाया गया,हालत नाजुक होते देख उसे ऋषिकेश स्तिथ AIIMS लाया गया,परन्तु बाद में पीड़िता की हालत नाजुक होने के चलते  दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल ले जाया गया।
इस घटना का जब स्थानीय लोगो को पता चला तो उन्होंने प्रदर्शन करने शुरू करे,राज्य के भिन्न भिन्न स्थानों पर पीड़िता को न्याय दिए जाने के लिए प्रदर्शन करे गए।
पुलिस ने जब आरोपी से पूछताछ की तो उसने गुनाह कबूला और बताया कि उसने इस घटना को अंजाम अपनी बेईज्जती का बदला लेने के लिए दिया। पीड़िता ने दो साल पहले छेड़खानी के चलते आरोपी को सबके सामने थप्पड़ मारा था,इस घटना का बदला लेने के लिए आरोपी मौके की तलाश में था और उसे मौका तक मिला जब पीड़िता प्रयोगात्मक परीक्षा देकर अपनी स्कूटी से घर जा रही थी,आरोपी मनोज ने उसका पीछा करा और इस वारदात को अंजाम दिया।
हफ्ते भर जिंदगी और मौत से संघर्ष करते हुए कल 23 दिसंबर 2018 को पीड़िता ने दम तोड़ दिया,पीड़िता का अंतिमसंस्कार उनके पैतृक गांव में किया जाएगा
यह  घटना अपने पीछे कुछ सवाल छोड़ गयी,अगर हम अपने राज्य और देश की बेटियों को सुरक्षित रखना चाहते है तो इन सवालों का जवाब देना पड़ेगा
सवाल है:-
आखिर इन वारदातों का इंतज़ार क्यों किया जाता है की कोई आये और ऐसी शर्मनाक हरकत को  दें ?
आखिर क्यों आरोपी को तत्काल सख्त से सख्त सजा देकर पीड़ित वर्ग को न्याय के लिए भटकना पड़ता है ?
जब मालूम था के उत्तराखंड में इतनी नाजुक स्तिथि से झूझ रही पीड़िता का  इलाज संभव नहीं है तो उसे सीधा दिल्ली क्यों नहीं ले जाया गया
आखिर इन वारदातों को रोकने के लिए सरकार कब कड़े कानून बनाएगी जिससे गुनाह करने से पहले व्यक्ति 100  बार सोचे।
मेरा आप सभी से अनुरोध है,इस विपदा की घडी में एकजुट होकर परिवार का हौंसला बढ़ाये और प्रदर्शनो को मात्र कुछ दिन की औपचारिकता न बनने दें,और जब तक पीड़ित परिवार को न्याय न मिले तब तक संघर्ष जारी रके ताकि सरकार की नींद खुले और वो सख्त से सख्त  कानून बना कर इन घटनाओ को रोक सके
अंत में मेरी ईश्वर से प्रार्थन है की दिवंगत आत्मा को मोक्ष दें और पीड़ित परिवार को इस असहनीय दुःख झेलने की क्षमता दें।
मेरे द्वारा इस लेख में कोई भी त्रुटि हो तो मुझे माफ़ कीजियेगा  

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